मैं आज अपना एक छोटा सा अनुभव बताने जा रहा हूं.
दोस्तों मैंने जीवन में बहुत सारे उतार-चढ़ाव देखा जीना मरना,दाना भागना. हर वह चीज जो इस जिंदगी में हमें करना पड़ता है वह सभी चीज मैं रोज करता हूं.
सूरज की पहली किरण मुझे एक नई उम्मीदों के साथ जगाती है कभी मैं आता कभी मैं जीता हूं. लेकिन दूसरा दिन मेरा वैसे ही चालू हो जाता है.
क्या मेरी जिंदगी की समस्या पैसा,घर,प्यार है.
मुझे समझ नहीं आता कि मेरी जिंदगी में समस्या क्या है, पैसा कमा लूंगा तो उसको बचाने की समस्या घर में रहूंगा तो उन्हें संभालने की समस्या, परिवार में सब अलग-अलग लोग होते हैं सब को समझने की समस्या,प्यार मिल जाएगा धोखा देने की समस्या. दोस्तों मैंने देखा हूं कि जीवन में सिर्फ समस्या ही है हमारे सबसे अच्छा दोस्त समस्या जो हमें कभी नहीं छोड़ता कमबख्त बेवफा तो वह उपाय है जो हमें समस्या से भागने का अवसर प्रदान करती है. हम जीवन में कितना भी गिर जाए हम चाहे बुरे हो अच्छे हो काले हो गोरे हो बूढ़े हो जवान हो औरत हो आदमी हो चाहे आप बच्चे क्यों ना हो समस्या सबको समान ही आती है क्या हमने सोचा है कि समस्या से भागना क्यों है जब समस्या हमें छोड़ नहीं सकती तो हम समस्या से क्यों भाग्य. क्या हमने यह विचार किया है कि हम समस्या से क्यों भागते, इसके तीन कारण है "इच्छा, डर, भावना"
अभी आप यह सोच रहे होंगे की इच्छा डर और भावना हमारी समस्या से भागने का कारण क्यों! चलो बता ही देता हूं मेरे दोस्तों इच्छा एक ऐसी बीमारी है, जो इंसान को सुख दुख की झूले पर झूलती रहती है,सोचिए अगर राजा महाराजाओ को जमीन जायदाद के लालच नहीं होता.गरीब को धन कमाने की इच्छा नहीं होती.बीमार को मृत्यु का भय ना होता, एक गायक को गाने की इच्छा ना होती लेखक को लिखने की इच्छा ना होती,शिकारी को शिकार करने की इच्छा ना होते, तो हमें कोई समस्या ही ना होती क्या मिला उस राजा को जिसने जमीन जायदाद पानी के चक्कर में कितने ही मासूमों के साथ युद्ध कर कर उन्हें मौत के घाट उतरवा दिया.क्या बोला उस गरीब को धन कमा के उसको मरने के बाद खाली आधी जाना पड़ा. क्या मिला उन गायों को को जिन्होंने जिंदगी भर अच्छा गायक बनने में बिता दी क्या मिला उस लेखक को जिसके लेख आज भी जलाए जा रहे हैं.
अब बात इच्छा की हुई है तो मैं कहानी बताना चाहूंगा एक बार एक गांव में दो व्यक्ति रहते थे. एक का नाम था रोहन दूसरे का नाम था मोहन. दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे. दोनों साथ में ही बड़े हुए दोनों ने साथ में ही पढ़ाई की और दोनों साथ में ही अपना भविष्य बनाने के लिए निकल पड़े दोनों ने बहुत पैसा समृद्धि और इज्जत कमाई है.लेकिन दोनों में एक ही फर्क था जहां रोहन अपनी कमाई से खुश होकर अपनी जिंदगी आराम से जी रहा था. वहां दूसरी और उसका दोस्त मोहन और पैसा कमाने के लिए अपनी जिंदगी छोड़कर रात दिन मेहनत करके और पैसा कमा रहा था. उसने इस जिंदगी को जीना ही छोड़ दिया था.वह तृष्णा व इच्छा के सागर में डूब चुका था दिन बीते गए दोनों की शादी हो गई. कुछ सालों बाद उन्हें बच्चे भी हुए लेकिन यहां पर भी फर्क दिखाई दिया गया.जहां रोहन अपनी कमाई हुई दौलत के ऊपर ही अपना गुजारा चलाने लगा वह रोज अपने व्यापार पर ध्यान देकर अपने परिवार पर भी ध्यान देने लगा या दूसरी और मोहन पैसे कमाने की अनंता इच्छा में इतना डूब चुका था कि उसने अपने परिवार अपनी बीवी और अपने बच्चों को वह संस्कारी ना दिए जो उन्हें देना चाहिए था मोहन रोहन के दौलत के मामले में अमीर तो था मगर सुखी नहीं. जा रोहन के बच्चे अच्छे पढ़े-लिखे और उसकी बीवी अच्छी संस्कारी थी वही मोहन के बच्चे बिना अच्छी परवरिश के बिगड़ चुके थे वह अपनी बीवी को ज्यादा समय ना देने के कारण उसकी बीवी भी उसको छोड़ कर चली गई आखिर क्या मिला इतनी दौलत कमा कर अगर आखिर उसे दुखी ही रहना पड़ा इससे हमें यह समझ में आता है कि पैसा कमाना हमारी समस्या नहीं है.समस्या तो यह आती रहेंगी.
Waiting For Part 2...

0 Comments
Please do not enter any spam link in the comment box